छुट्टियाँ
छुट्टियाँ
शीर्षक: छुट्टियाँ
आया है माह मई,गर्मी की छुट्टियों को लेकर,
बस्ता बंद हुआ है , किताबों को भी आराम।
ना कोई अलार्म की चिंता, ना स्कूल की जल्दी है,
देर तक सोने की अब तो, हम सबको आजादी है।
नानी का वो प्यारा घर जाएँगे,
नादानी कहानी सुन लेंगे।
मैसूर के मामा जी के घर भी जाएंगे
महल, बाग मजा से घुमाएंगे।
ऊटी में मौसी का घर जाएंगे,
नाव-सवार, घुडसवार खुशी से लेंगे।
खाएंगे रसीले आम ,पीएँगे शेख और छाछ।
खेलेंगे दोस्तों के संग, हर एक सुबह और शाम।
मन के सारे पंख खोलकर, दूर गगन में उड़ना है।
रोज नया कुछ काम करेंगे, नए शौक अपनाएंगे ।
फिर जब स्कूल खुलेगा, सुंदर यादें लेंगे ।
तरोताजा करने मन को, छुट्टियां घर आती हैं।
