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Dr.Padmini Kumar

Classics

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Dr.Padmini Kumar

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लोकतंत्र का त्यौहार लोकतंत्र का त्यौहार

लोकतंत्र का त्यौहार लोकतंत्र का त्यौहार

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लोकतंत्र का त्यौहार

फिर से आया है वह द्वार,
जिसे कहते 'लोकतंत्र का त्यौहार'।
गलियों में नारों का शोर है,
नेताओं की बातों में अब नया ज़ोर है।
हाथ जोड़कर घर-घर आते,
सपनों के महल वे नए सजाते।
पाँच साल जो कभी न दिखे,
आज द्वारे पर वे शीश झुकाते।
मुफ्त के वादे, मीठी बातें,
वोट के खातिर जागें रातें।
लेकिन ऐ मतदाता! तू धीरज रखना,
सच्चाई और वादों को खुद ही परखना।
जात-पात के भेद को तजना,
धर्म-नाम के जाल से बचना।
देश का भविष्य तेरे हाथों में है,
वोट की ताकत तेरी बातों में है।
एक बटन जो तुम दबाओगे,
किस्मत देश की तुम बनाओगे।
छोड़ो आलस, निकलो घर से,
वोट का अधिकार नहीं अब डर से।
चलो करें हम यह संकल्प महान,
ईमानदारी से करेंगे मतदान।
यही है वह शक्ति, यही है वह सार,
मजबूत बने हमारा लोकतंत्र हर बार।


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