पाँच उँगलियाँ-एक हाथ
पाँच उँगलियाँ-एक हाथ
कविता- पाँच उँगलियाँ-एक हाथ
पाँच उँगलियाँ, पाँचों न्यारी,
अलग-अलग है सबकी बारी।
एक अँगूठा, शक्ति का प्रतीक,
जो देता हर काम को सही दिशा सटीक।
तर्जनी दिखाए सही रास्ता हमें,
मध्यमा रहे सबसे ऊँची कद में।
अनामिका पर सजती है सुंदर अँगूठी,
कनिष्ठा छोटी, पर काम में अनूठी।
कद में छोटी-बड़ी, रूप में अलग पहचान,
पर जब मिल जाएँ पाँचों, तो बनता एक बलवान।
अकेली उँगली शायद कुछ न कर पाए,
पर मुट्ठी बन जाए, तो जग को झुकाए।
यही एकता का है सच्चा संदेश,
मिटा दे जो मन के सारे द्वेष।
पाँच उँगलियाँ जब एक हाथ बन जाती हैं,
असंभव को भी संभव बन दिखाती हैं।
