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Dr.Padmini Kumar

Classics

4.4  

Dr.Padmini Kumar

Classics

जीवन यात्रा जारी है

जीवन यात्रा जारी है

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शीर्षक: जीवन यात्रा जारी है

थकी नहीं हैं
पाँव की बेड़ियाँ,
अभी और भी ऊँची
 चढ़नी सीढ़ियाँ।
सूरज ढला तो क्या हुआ,
 चाँद की बारी है,
हिम्मत अभी मरी नहीं,
 जीवन यात्रा जारी है। [1]

कभी धूप की तपिश मिली,
कभी छाँव का सुख मिला,
कभी काँटों की चुभन मिली,
कभी यादों का मुख खिला।
सफर लंबा है मगर,
मंज़िल से वफ़ादारी है,
 रुकने का नाम नहीं,
जीवन यात्रा जारी है। [2]

उम्मीदों के झोले में,
कुछ सपने आज भी ज़िंदा हैं,
 गिरे भले ही सौ दफा,
पर हम आज़ाद परिंदा हैं।
वक़्त की हर करवट पर,
अपनी ही तैयारी है,
 संघर्षों के बीच ही,
जीवन यात्रा जारी है। [3]

अतीत की परछाइयों को,
पीछे ही छोड़ आए हम,
नए कल की आहटों से,
नाता जोड़ आए हम।
 हर साँस एक नया सबब,
 हर पल की दावेदारी है,
अनवरत, अविराम यह,
जीवन यात्रा जारी है। [4]


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