STORYMIRROR

Dr.Padmini Kumar

Classics

4  

Dr.Padmini Kumar

Classics

विद्यार्थी जीवन

विद्यार्थी जीवन

1 min
4

स्वर्ण काल: विद्यार्थी जीवन

पुस्तकों के बोझ में,
सपनों का संसार है,
नया सीखने की चाह,
और मन में विचार है।
भोर की वो पहली किरण,
स्कूल की वो घंटी,
अनुशासन की राह पर,
चलती अपनी टोली।
कठिन गणित के सूत्र हों,
या विज्ञान की पहेली,
सच्ची मित्रता ही यहाँ,
बनती सबसे सहेली।
मैदान की वो धूल,
और जीत का वो शोर,
खींचती है भविष्य की,
सुनहरी एक डोर।
गुरुओं का आशीर्वाद,
 ज्ञान का अनमोल दान,
यही समय है गढ़ने का,
अपना नया आसमान।
परीक्षाओं का डर कभी,
कभी अंकों की होड़,
पर यही संघर्ष सिखाता है,
मुश्किलों को मरोड़।
मौज-मस्ती की यादें,
और कागज़ की वो नाव,
विद्यार्थी जीवन ही है,
जीवन का सबसे सुंदर पड़ाव।
न चिंता कल की कोई,
न दुनिया का है भार,
यही है वह समय,
जो देता व्यक्तित्व को आकार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics