STORYMIRROR

Aditi Vats

Classics

4  

Aditi Vats

Classics

लालिमा सी शुभ

लालिमा सी शुभ

1 min
306


हिमवान और मैना देवी की पुत्री थी वो 

बचपन से शिव को जिसने साधा 

बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया 

पार्वती माता थी वो।।


लाल आलते लगे पैरों से तप को चली थी वो

भूलकर महल की सुख सुविधा

शिव को पाने की तपस्या में थी वो 

पार्वती माता थी वो।।


वो हजारों वर्षों तक तप में लीन थी

ब्रह्मचारी सा जीवन जीने में लीन थी

दुनिया की सुध बुध खो शिव में लीन थी

पार्वती माता थी वो।।


उनके जैसा तप किसी ने ना किया था 

देवों ने ये दृश्य पहली बार देखा था

तभी ब्रह्मा ने उन्हें नाम ये दिया था 

तप लीन से "शैलपुत्री" थी वो।।


शुभ, उल्लास और जुनून का प्रतीक बनी 

शुभ कदमों से हिमालय वो आई

लालिमा सी शुभ सब कर गई वो 

पार्वती माता थी वो।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics