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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy Classics

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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy Classics

ख्वाबो की दुनिया

ख्वाबो की दुनिया

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हकीकत की दुनिया हमें रास ना आई तो ,

हम ने ख्वाबों कि दुनिया ही खड़ी कर डाली।


हकीकतकी दुनियामें उजियाला कभी हम ने देखा ही नहीं था।

ख्वाबोंकी दुनिया में अंधेरा कहीं नजर ही नहीं आया।


कांटोकी चुभन मिली हमें हकीकतोंकी दुनिया में,

ख्वाबों की दुनिया में कोई कांटा नजर ही नहीं आया।


गमो से पाला पड़ा था हकीकतोंकी दुनिया में हमारा,

लेकिन ख्वाबों कि दुनिया में गम का साया भी नजर नहीं आया।


कोई अपना बना ही नहीं था हकीकतों की दुनिया में,

लेकिन ख्वाबों कि दुनिया में कोई बेगाना नजर ही नहीं आया।


हकीकत की दुनिया हमें रास ना आई तो,

हम ने ख्वाबों कि एक दुनिया ही खड़ी कर डाली।


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