खुशी का कारण
खुशी का कारण
खुशी का कारण तलाश रहे थे
मिला नहीं एक भी उत्तम कारण
किसी ने पूछ लिया भई कैसे हो ?
जवाब मिला जैसे आप देख रहे हो।
बातों का सब जंजाल है, जैसा जिसको सही लगा
कोई मददगार बना तो, कोई हंसी का पात्र बना
खुशी से सबको प्यार बांटकर, ईश्वर का ध्यान लगाया
किसी ने इसे आडम्बर कहा तो, किसी ने आनंद पाया।
भटक रहा है जग में मानव
खुशियों की सौगात पाने को
सोच को अपनी बदल न पाता
परेशान है कारण जानने को।
बना हुआ है धन्ना सेठ मगर
कुढ़ना उसने बन्द ना किया
हर दिन हर पल व्याकुल होकर
दोष निकालना कम ना किया।
नकारात्मक नज़रिया है जब तक
मानव ! तुम खुशी ढूंढ न पाओगे
छप्पन भोग खाकर भी तुम यूं
कभी तृप्त नहीं हो पाओगे।
छोड़ दो खुशी का कारण ढूंढना
बस आज पर विश्वास करो
ईमान को तुम जीवित रखकर
अनायास खुशी स्वीकार करो।
