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Aishani Aishani

Romance Tragedy

4  

Aishani Aishani

Romance Tragedy

कैसा साथ..!!

कैसा साथ..!!

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सुनो सच कहूँ..? 

तुमसे कहीं मिली नही

ना ही तुम्हें कभी देखा

शायद ही कभी ख़्वाबों में

दो चार बातें हुई हों पर..

जब भी किसी और के साथ

तुझे देखती हूँ तो

कुछ टूटता सा है

एक खालीपन भर जाता है भीतर तक

लगता है वर्शों का साथ जन्मों का संबंध

एक बार में चूर चूर हो गया

और फिर

रोता है दिल फ़ुट-फुटकर

सुनो ना.. 

सच सच बताओ ये क्या है

मेरा पागलपन या फिर...

किसी के जीवन को संवरते हो

तो किसी का जीवन नितांत विरान..!!



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