केवल आप ही पापा..!
केवल आप ही पापा..!
मैंने माना वो पूरे नहीं मेरे
हर इक के हिस्से उनका स्नेह
किसी को भरपूर तो
किसी किसी को टुकड़ों में मिलता
पर...
कोई रिक्त नहीं वंचित नहीं उनके स्नेह से
मेरे हिस्से भी आया उनका स्नेह
पर..
जरा सा हट के,
लोगों की नज़र में कुछ नहीं
पर..
उनका ये स्नेह मेरे लिए अकिंचन नहीं
अल्प भी नहीं अपितु क्षितिज सा असीम
जिसका कोई ओर छोर नहीं
बस उसे पकड़ने को चलते रहने का सुख
कुछ अलग ही होता है
बस..
ऐसे ही मेरे लिए हैं वो
अरे..!
वो कोई और नहीं
इस जहां में मेरे सृष्टिकर्ता सृजनहार
मेरे माँ पापा
हर दुःख से रखा महफूज़
जो चाहा वो उनके पनाह में मिला
हम उन्हें कभी समझ पाए या नहीं
पता नहीं पर..
सच यही है
और एक सच यह भी कि
उनके रहते तरस रहे हैं उनकी आवाज को
उनके स्नेह और उनके आत्मीय आलिंगन को
और कुछ पल के साथ कुछ
कदम की चहल कदमी को
और क्या बताये..!!
Shipra Pandey 'Jagriti'
