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Lakshman Jha

Drama

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Lakshman Jha

Drama

कैद में है बुलबुल

कैद में है बुलबुल

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क़ुछ तरीका

तो बदल देते,

कुछ सलीका

तो बता देते !


उनके दुःख

को समझकर,

गले प्यार से

उनको लगा लेते !


किये लाख वादे

दर पे जाके,

मिलेगा काम

सबको यहाँ पर !


विकास की वयार

यहाँ बहेगी,

अमन -शांति

रहेगी यहाँ पर !


हमें लोगों ने चुन

सेवक बनाया,

सबसे जुड़ने का

मंत्र सिखाया !


'प्रधान सेवक 'के

ताज रखकर,

हमें प्रजातान्त्रिक

पाठ पढ़ाया !


पर सत्ता के मद में

हम चूर हुए,

अपने वादों को

पीछे छोड़ गए !


370 और 35 A

को निष्काषित कर

उन लोगों को

हम भूल गए !


प्रजातंत्र में प्रजा

हमारी शक्ति है,

संघ राज्य के साथ

चलें भक्ति हैं !


निरंकुशता जब

सिर छा जाता है !

प्रलय का संकेत

नजर आता है !


हम दूर रहकर

जश्न में डूब जाएँ,

अच्छा हुआ

370 /35 भूल जाएँ !


पर कैद में है

बुलबुल सिसकती

सैयाद बिन ताल के

ढोलक बजाएँ !


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