साथी "
साथी "
मुझे है गर्व अपनों पर मिला है आपका ही साथ !
कभी छूटे नहीं बंधन ना छूटे आपका ही हाथ !!
सदा हो प्रेम की बारिश सदा हो साथ अपनों का !
ना बिछुड़े हम कभी दोनों महल बन जाय सपनों का !!
कभी जो हम भटक जाएँ मुझे तुम राह दिखलाना !
संभालना भूल जायेँ हम सहारा तुम मेरा बनना !!
अकेले कुछ नहीं होता नहीं मंजिल को पा सकते !
कोई यदि साथ भी ना हो मजे से जी नहीं सकते !!
खुशी के पल में हम दोनों मजे से गीत गाएँगे !
नहीं गम पास आएगा सदा ही मुस्कुराएंगे !!
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डॉ लक्ष्मण झा परिमल
11 1 2026
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