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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Romance

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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Romance

होते होते हो जाना

होते होते हो जाना

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हमदोनों

को

एकदूसरे

को

घूरना

तुम्हारे

द्वारा

नफरत

करना

मेरे

द्वारा

तुम्हे

प्रेम

से

देखना

यही

प्रेम

है

तुम्हारे

नफरत

के

भीतर

भी

प्रेम

मेरे

प्रेम

में

तो

है

हीं

प्रेम

नफरत

और

प्रेम

के

समावेश

से

प्रेम

का

जीत

होना

प्रेम

का

हो

जाना

फिर

मिलन

हो

जाना

दो

से

एक

हो

जाना

प्रेम

के

हीं

मुख्य

तत्व

है

होते

होते

हो

जाना।


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