प्रेम निशब्द
प्रेम निशब्द
प्रेम
का
ना
ओर
होता
है
ना
छोर
होता
है
न
हीं
प्रेम
का
कोई
डोर
होता
है
यह
सिर्फ
पहेली
है
जो
अनुभवों
में
होता
है
अनुभूतियों
में
होता
है
सोच
में
होता
है
यह
अमूर्त
होता
है
प्रकृति
का
सबसे
खूबसूरत
तोहफा
है
जिसको
परिभाषित
करने
में
निशब्दता
का
सामना
करना
पड़ता
है
इसका
अंत
कहां
यह
अनंत
होता
है
