STORYMIRROR

Vaibhav Dubey

Abstract

4  

Vaibhav Dubey

Abstract

टेसुओं के रंग

टेसुओं के रंग

1 min
384

दिल मिलें,शिकवे मिटें इस पर्व की सौगात है

आ गई होली-ठिठोली की ये ऋतु क्या बात है


प्रीत की सरिता बही डूबे हैं आँगन रंग में

अंग हैं मदमस्त पीकर भंग,फागुन रंग में

मुख सभी पीले, गुलाबी, लाल, काले हो गए

प्रेम की अनुभूतियों में इस कदर सब खो गए


बज रहे हैं ढोल-ताशे जीत की ये रात है

आ गई होली-ठिठोली की ये ऋतु क्या बात है


दिल सभी के भर गए हैं इक हसीं अहसास से

हो रही बर्षा मिलन की भीगे सब उल्लास से

लौट कर परदेश से बेटे-बहू घर आ गये

बूढ़ी माँ की आँखों में खुशियों के बादल छा गए


ना किसी की शह है इसमें न किसी की मात है

आ गईहोली-ठिठोली की ये ऋतु क्या बात है


पापड़ों की चुरमुराहट और गुझियों की महक

शोर बच्चे कर रहे हैं जैसे चिड़ियों की चहक

घुल गया महुआ हवा, में रंग टेसू भर रहे

चल रही मस्तों की टोली लोग स्वागत कर रहे


होली में सूरज बराती,चाँद की बारात है

आ गई होली-ठिठोली की ये ऋतु क्या बात हैे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract