STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Romance

4  

V. Aaradhyaa

Romance

प्रेम के रंग रंग जाओ

प्रेम के रंग रंग जाओ

1 min
11

मैं तो मोहन के प्रेम के रंग में रंगना चाहती थी।

मैं भोली एक नारी यह सब करना चाहती थी।


राह तकती रही श्याम की, अबकि बार शायद आ जाए।

एक एक लम्हा इंतजार का मैं करके हारती थी।


मधुबन में एक बार जाकर प्रिय संग लेकर तरंग।

हर ग़म दूर भगाकर तन मन में ले उमंग।

नाम की चुनरिया ओढ़ कान्हा ,मै , चुनर भिगोना चाहती थी।


यह धरा यह आसमां साक्षी अपने प्यार का।

जिंदगी का यह मौसम लाएं मदहोश बहार का।

फिर तुझे में ही खोकर ये दिन पाना चाहती थी।


रंग बिरंगी खुशियां मेरी, रंग बिरंगी शाम।

हर तरफ तेरी सुरतिया, और लबों पर नाम

कहां हो मोहन बांसुरी बजाओ, बंशी की धुन में चाहती थी।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance