"साथी "
"साथी "
मुझे है गर्व अपनों पर मिला है आपका ही साथ !कभी छूटे नहीं बंधन ना छूटे आपका ही हाथ !! सदा हो प्रेम की बारिश सदा हो साथ अपनों का !ना बिछुड़े हम कभी दोनों महल बन जाय सपनों का !! कभी जो हम भटक जाएँ मुझे तुम राह दिखलाना !संभालना भूल जायेँ हम सहारा तुम मेरा बनना !! अकेले कुछ नहीं होता नहीं मंजिल को पा सकते !कोई यदि साथ भी ना हो मजे से जी नहीं सकते !! खुशी के पल में हम दोनों मजे से गीत गाएँगे !नहीं गम पास आएगा सदा ही मुस्कुराएंगे !!===================डॉ लक्ष्मण झा परिमल
