टमाटर और मेरी कविता” (हास्य कविता)
टमाटर और मेरी कविता” (हास्य कविता)
साल के अंतिमऔर सालके प्रथम चरण मेंव्यस्तता ने मुझे कोईनयी रचना रचने नहीं दियामैं दिन रातबीते साल की बिदाई औरऔर नए सालकी बधाई और शुभकामनाओंमें उलझा रहादो दिनों के बादमुझे फुर्सत मिलीआज सोचा कोई लेखनीया कोई कविता ही लिखी जायकुछ अच्छे शब्दों को ले कररस अलंकारों के रंगों सेकोई अद्भुत मूर्ती बनाई जायएकांत में बैठकल्पना के घरोंदों में एककविता की रूप रेखा कासृजन होने लगाशब्द मानसपटल पर आने लगेविधा को चुन ही रहा थाकि दूसरे कमरे से श्रीमती जी की आवाज आयी“ सुनते हो ? पालक साग बनेगी कैसे ?टमाटर तो एक भी नहीं है !”मेरे शब्द ,विधा ,रस और अलंकारसब धरे के धरे रह गएअब सिर्फ टमाटर की बारी आयीमैंने बंद किया अपना लेपटोपऔर चल पड़ा बाज़ारटमाटर लानेकविता तो मेरी बनती रहेगीफिर कभी जाने अनजाने !!===================डॉ लक्ष्मण झा परिमल
3 जनवरी 2026
