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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

" मिथिलाक नारीक बदलल स्वरुप " (मैथिली )

" मिथिलाक नारीक बदलल स्वरुप " (मैथिली )

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संदर्भ :-“मिथिलाक नारीक बदलल स्वरूप” कविता  मे आधुनिक कालमे मिथिलामे नारीक स्थिति आ ओकर अधिकारक बात कयल गेल अछि  । एहिमे  नारी कोना आब अपन अधिकारक प्रति जागरूक भ' रहल छथि आ अपन सपना पूरा करबाक लेल आगू बढ़ि रहल छथि तकर वर्णन अछि ।

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" मिथिलाक नारीक बदलल स्वरुप "

               (मैथिली )

      डॉ लक्ष्मण झा “परिमल “

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आब मात्र कविता धरि

सीमित रहि गेल ,

" चलू प्रियतम 

मेला चलू..

हम चूड़ी कीनब ,

हम लहठी कीनब ,

चन्द्रहार लेब 

टिकुली ,अल्त्ता

नेल पोलिश लेब "!!

आब गामो मे ऑनलाइन 

सब भेट जाइत अछि !

आहां खाली 'पे टियम'

सं पाई पठाऊ

घर बैसल 

सब चीज द' जाइत अछि !!

आब हम सओउन मे

नोर अप्पन 

किया बहायब ?

मधुमास ,होरी उत्सव मे

अप्पन अंग 

किया जरायब ??

ऑनलाइन टिकट कटा 

ए० सी ० मे बैइस कें

आहां लग पहुँचि

' धप्पा ' कहि देब !

मन जतय करत 

कलकत्ता ..बोम्बॉय

घूमि लेब !!

मोबाइल लैपटॉप क 

जमाना छैक ,

गेल जमाना जखन 

मनी आर्डर 

अबैत छल !

हमर चिठ्ठी डाकिया बाबू

घर ल' अबैत छल !!

आब ए० टी ० ऍम ० 

हुनका सं 

ल ' लेने छी !

पाईक खगताह लेल 

ककरो नहि

मुँह तकैत छी !!

कवि कविता लिखैत रहथू

हम नहि अबला 

नारी छी !

आब रणक्षेत्र ..आकाश ..आ ..समुद्र मे

गर्व सं झंडा 

फहराबैत छी !!

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डॉ लक्ष्मण झा “परिमल “


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