"विरहणी क विरह गीत "
"विरहणी क विरह गीत "
अदरणीय “StoryMirror ”मंच को स्वरचित मौलिक मैथिली कविता सादर समर्पित !
संदर्भ : --इस कविता में प्रेमिका के दिल की आह को शब्दों में पिरोया गया है, जो अपने प्रेमी से बिछड़कर आंसू बहा रही है। वह कहती है कि आपने मुझे भुला दिया है, लेकिन फिर भी मेरे आंसू नहीं रुकते । सावन की बारिश, चांदनी रात, और अंधकार। ये प्रतीक प्रेमिका के दिल की दर्द और विरह को और भी गहरा बनाते हैं !
दिनाँक :--06 फरवरी 2026
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डॉ लक्ष्मण झा ” परिमल ”
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आहाँ बिसरि गेलहूँ आहाँ बिसरि गेलहूँ हम नोरे केवल पोछैत छी !
आहाँ बिसरि गेलहूँ आहाँ बिसरि गेलहूँ हम नोरे केवल पोछैत छी !!
भेल कतेक दिवस
कोनो नहि पता ,
हम गीत विरह
गबैत छी सदा ......
भेल कतेक दिवस
कोनो नहि पता ,
हम गीत विरह
गबैत छी सदा !!
अछि इ साऔन हमर कोंढ़ कटैत
अछि इ साऔन हमर कोंढ़ कटैत ,
हम नोरे केवल पोछैत छी !!
आहाँ बिसरि गेलहूँ आहाँ बिसरि गेलहूँ हम नोरे केवल पोछैत छी !
आहाँ बिसरि गेलहूँ आहाँ बिसरि गेलहूँ हम नोरे केवल पोछैत छी !!
अछि चाँदनी राति
अन्हार हमर
जेना बुझु फुटल
कप्पार हमर ...
अछि चाँदनी राति
अन्हार हमर
जेना बुझु फुटल
कप्पार हमर !!
अछि इ मिलन केर योग अखन
अछि इ मिलन केर योग अखन
हम नोरे केवल पोछैत छी !!
आहाँ बिसरि गेलहूँ आहाँ बिसरि गेलहूँ हम नोरे केवल पोछैत छी !
आहाँ बिसरि गेलहूँ आहाँ बिसरि गेलहूँ हम नोरे केवल पोछैत छी !!
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डॉ लक्ष्मण झा ” परिमल ”
