STORYMIRROR

Dr. Akshita Aggarwal

Tragedy Fantasy Others

4  

Dr. Akshita Aggarwal

Tragedy Fantasy Others

काला जादू

काला जादू

1 min
284

ना जाने कैसे-कैसे जादू

करने लगे हैं अब लोग सारे??....

ना जाने अपने काम निकलवाने के लिए,

कैसे-कैसे काले जादू जैसी चीज़ के पीछे।

भागते लोगों के दिखने लगे हैं अब नजारे। 

रहने लगे हैं कुछ लोग पूरी तरह।

काले जादू के ही सहारे।

ना जाने क्यों नहीं समझ पाते वो लोग कि, 

लाल, पीले, नीले, काले जादू सभी बेकार हैं ये सारे। 

कभी नहीं रहना चाहिए इन काले जादू के सहारे। 


काले जादू के नहीं बल्कि काले श्याम के जादू में।

फँस कर देख एक बार ए इंसान बावरे।

उसकी मुरली की धुन सुनने को तो,

सदा उनके पीछे-पीछे भागते थे गोकुल के वासी सारे।

उनकी मुस्कान प्यारी के आगे तो, 

ठहर ही नहीं सकते कोई और नजारे।

काले जादू का तो पता नहीं पर

काले श्याम का जादू सभी का जीवन है सँवारे।

हर जादू, हर काला जादू बेकार है।

छोड़ दो रहना उनके सहारे। 

रह कर देखो बस एक बार उस साँवरे के सहारे।

किसी जादू की जरूरत ही नहीं उसे।

जो हर वक्त उस साँवरे को पुकारे।

उस साँवरे को पुकारे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy