STORYMIRROR

Chitra Chellani

Tragedy

4  

Chitra Chellani

Tragedy

जैसे खोयी है गौरैया...

जैसे खोयी है गौरैया...

1 min
354


जब यादों से मन भर आया 

नैनों ने छलकाया पानी

जैसे खोयी है गौरैया 

वैसे खोयी बिटिया रानी 

हर ऋतु को था ऋतुराज किया 

मृदु वाणी ऐसी बोल गयी 

मैंने डाले बस कुछ दाने 

वो श्रुति में अमृत घोल गयी

सुख से पूरित था धाम मेरा 

अनुकंपा मुझ पर सारी थी 

गौरैया नित्य चहकती थी 

वो वेला कितनी प्यारी थी 


लौट अजिर में आने को अब

ढूँढ नहीं पाती रंग धानी 

जैसे खोयी....


जबसे तुमने विदा किया है 

रिश्ते नव नूतन जोड़ दिए 

मौन अधर पर धर कर तब से 

बिटिया ने निज पथ मोड़ लिए 

एक हृदय में तीन हृदय की 

पीर बसा कर ये रखती है 

बिटिया माँ बाबा की पीड़ा

उनके जितनी ही सहती है 


पारावार हुए हैं दृग अब 

कहते, बंद करो मनमानी 

जैसे खोयी....!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy