कागज़ी निगाहे
कागज़ी निगाहे
कागज़ी सी यह निगाहें, करती है क्या क्या बयाँ,
रहना चाहूँ दर पे उसके, यार मुझको ना जगा ।
कहना चाहूँ ,कह ना पाऊ, चाहुँ यह नाज़िदीकिया,
तुझमे उसका अक्स बसा है, तु हो जा मुझमे फना।
प्यार तुझको इतना दुकी, हारे मुझसे सारा जहाँ,
मेरी अक़ीदत को तू सुन ले, ऐ मेरे दिल बर जहाँ।
कागज़ी सी यह निगाहें, करती है क्या क्या बयाँ,
रहना चाहूँ दर पे उसके, यार मुझको ना जगा।

