'कागज़ी सी यह निगाहें, करती है क्या क्या बयाँ, रहना चाहूँ दर पे उसके, यार मुझको ना जगा' एक प्यारभरी स... 'कागज़ी सी यह निगाहें, करती है क्या क्या बयाँ, रहना चाहूँ दर पे उसके, यार मुझको न...
कागज़ी हैं सब यहाँ........! कागज़ी लोग,कागज़ी रिश्ते। कागज़ी हैं सब यहाँ........! कागज़ी लोग,कागज़ी रिश्ते।
पाक हैं इतना कि अब बोले न कोई, नापाक अल्फाज़ो वाले भी अब शरम करते हैं । पाक हैं इतना कि अब बोले न कोई, नापाक अल्फाज़ो वाले भी अब शरम करते हैं ।