करते हैं
करते हैं
चल आज हम कागज़ी बात करते हैं ,
कानूनी किस्से तेरे नाम करते हैं ,
खुशी मिले हारने में अब जिस दिल को,
उस दिल को आज तेरे नाम करते हैं ।
बुलबुले से नाज़ुक रिश्तों को अपने,
साबुन की तरह साफ करते हैं ,
ये चाँद सा रौशन चेहरा हैं उनका,
किस्से नहीं, अब ज़िन्दगी पूरी उनके नाम करते हैं ।
ओस की बूंद सी हैं वो,
जो भोर को शीतल ख़ुशनाम करते हैं ,
स्याही में बसा लिया हैं तुझको,
अब तो कलम भी कमाल करते हैं ।
आईने में आजकल खुद को मैं पाता नहीं,
कुछ इस तरह ज़ेहन में तू बसी हैं ,
सपने होते हैं सच कहती हैं दुनिया,
नींद भरी आँखों को जगना ही सही है ।
कोई ग़ालिब नहीं पर प्रेम की बात करते हैं ,
दूर हैं पर तुझसे दूर होने से डरते हैं ,
कलम से बातें करते हैं , तुझे हम आज रखते हैं ,
हलक से निकले न जो अब मेरे कागज़ सब कहते हैं ।
आप दिल में रहते हैं !
एक ख़ुशनुमा शहर बना लिया हैं ,
राज़ चलता हैं आपका यहाँ,
रानी तुझे जो बना दिया हैं ।
शुरू होने से पहले अब किस्सा खतम करते हैं ,
सेना हैं उनकी, गुरूर का भरम रखते हैं ,
पाक हैं इतना कि अब बोले न कोई,
नापाक अल्फाज़ो वाले भी अब शरम करते हैं ।

