Antariksha Saha
Action Classics Inspirational
सितमगर हो तुम सितम ढाते जाओ हम सपने देखने वाले उसे नकार कर कोशिस करते जाएंगे जीत ना मिले तो सही कभी कोशिश का दामन नहीं छोडेंगे जिद या अहंकार नहीं है मजदूर है हम लड़ना हम भूले नहीं
मूरत
घाव कुछ गहरे ...
ख़ामोशी
मजदूर
झूठी मुस्कान
लक्ष्य
फ़ोन नंबर
मीठी चासनी
घर
angrayian
अपने अस्तित्व बचाने को, हथियार उठाना पड़ता है। अपने अस्तित्व बचाने को, हथियार उठाना पड़ता है।
मां भारती के वीर सपूतों को शत-शत प्रणाम। मां भारती के वीर सपूतों को शत-शत प्रणाम।
यहाँ से उठ गया दाना पानी लो अब हम तो सफ़र करते हैं। यहाँ से उठ गया दाना पानी लो अब हम तो सफ़र करते हैं।
तो जाति, धर्म कहाँ से आया ? वैसे ही आँसू का कोई धर्म नहीं। तो जाति, धर्म कहाँ से आया ? वैसे ही आँसू का कोई धर्म नहीं।
स्कूलों की बिल्डिंग चारदीवारी के अंदर बंद हो है गई। स्कूलों की बिल्डिंग चारदीवारी के अंदर बंद हो है गई।
खौफनाक तूफानों से जान को बचाये रखना खौफनाक तूफानों से जान को बचाये रखना
खामोशी को तोड़ते हैं मुस्कराहट चेहरे पर लाते हैं हम। खामोशी को तोड़ते हैं मुस्कराहट चेहरे पर लाते हैं हम।
ये बहरों की बस्ती है, चिल्लाऊं किस पे ये अच्छा है मौका, तू मुंह को छुपा ले ये बहरों की बस्ती है, चिल्लाऊं किस पे ये अच्छा है मौका, तू मुंह को छुपा ले
तेरे स्मारक होगी भारतवासियों के दिल में। तेरे स्मारक होगी भारतवासियों के दिल में।
अपने मित्रों के मनमंदिर में प्रेम का दीप जलना होगा ! अपने मित्रों के मनमंदिर में प्रेम का दीप जलना होगा !
क्या कहती हो, ठहरो नारी ! क्यों अब भी केवल निष्ठाहीन हो, तौहीन हो.. क्या कहती हो, ठहरो नारी ! क्यों अब भी केवल निष्ठाहीन हो, तौहीन हो..
Thank you Thank you
कोरोना से न मानेंगे हार, हम फिर पकड़ेंगे रफ्तार। कोरोना से न मानेंगे हार, हम फिर पकड़ेंगे रफ्तार।
जिस दिन मौन टूटा प्रलय का बुलावा खड़ा होगा तुम्हारे द्वार पर। जिस दिन मौन टूटा प्रलय का बुलावा खड़ा होगा तुम्हारे द्वार पर।
माँ भारती के वीर सपूत, सनातन धर्म की आन-बान-शान, माँ भारती के वीर सपूत, सनातन धर्म की आन-बान-शान,
भारत जल्द ही कोरोनावायरस से मुक्त हो जाएं। भारत जल्द ही कोरोनावायरस से मुक्त हो जाएं।
कविता : मरीना त्स्वेताएवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास कविता : मरीना त्स्वेताएवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
गया प्रभात, गई दुपहरिया हुई सुबह से शाम मन तू भजेगा कब, हरि नाम गया प्रभात, गई दुपहरिया हुई सुबह से शाम मन तू भजेगा कब, हरि नाम
ना भूले हम उन महा वीरों को, जो रहे हमारे कर्णधार हैं। ना भूले हम उन महा वीरों को, जो रहे हमारे कर्णधार हैं।
गुजरे हुए लम्हों की किताब होगी खास। गुजरे हुए लम्हों की किताब होगी खास।