STORYMIRROR

Devendraa Kumar mishra

Tragedy

4  

Devendraa Kumar mishra

Tragedy

इस शहर में

इस शहर में

2 mins
374

इस शहर में यारों सब कुछ मिलता है 

गरीब के घर सूखी रोटी नहीं 

अमीर के उपवन में गुलाब खिलता है 

इस शहर में मिलते हैं हज़ारों बेरोजगार 

जो रोज अर्जी देते हैं नौकरी के लिए 

मगर नौकरी है कि मिलती नहीं 

ठीक वैसे ही जैसे भगवान हैं कि मिलते ही नहीं 

ढूंढते है वृद्ध पिता, वर बिटिया के लिए 

मगर वर हैं कि मिलते ही नहीं 

ठीक वैसे ही जैसे बड़े शहरों में मकान हैं कि मिलते ही नहीं 

शहर में मिलती हैं लंबी कतारें 

राशन की दुकान पर 

मकान तलाशते किराएदार 

रोजगार दफ्तर के चक्कर लगाते उम्मीदवार 

हर ओर भीड़ असंख्य और अपार 

शिक्षा के नाम पर चलता हुआ व्यापार 

इस शहर में मिलते हैं झूठे आश्वासन 

खोखली नारेबाजी, व्यर्थ के भाषण 

बढ़ती हुई कीमतें, अफसरों की तानाशाही 

चारों ओर फ़िल्मों के घटिया पोस्टर 

फाइल दबाते क्लर्क 

सरकारी बसों का हाल 

जितने बैठे उतने खड़े यात्री 

अतिक्रमण पर आक्रमण करते नगर निगम कर्मचारी 

इस शहर के थियेटरों में खटमल मिलते हैं 

अपनी माँगों को लेकर भूख हड़ताल करते कर्मचारी मिलते हैं 

कम तौलते व्यापारी, पानी बेचते दूध वाले 

मिलावट करते मुनाफाखोर, स्कूल से पीरियड गोल करते बच्चे,

चक्काजाम करते दल मिलते हैं 

इस शहर में एक से एक डॉक्टर मिलते हैं 

हर रोग के विशेषज्ञ मिलते हैं 

मगर ऐसा कोई नहीं मिलता 

जो गरीबों, भूखों, नंगों का इलाज कर सके 

ऐसा कोई अफसर, नेता या आदमी नहीं मिलता 

जो स्वयं भूखा रहकर दूसरों का पेट भर सके 

इस शहर में झूठ, फरेब, मक्कारी सब कुछ मिलता है 

आधुनिक फैशन, सभ्यता का भंडार मिलता है 

विदेशी कुत्तों को पालते, सहलाते लोग मिलते हैं 

गरीबों को धुतकारते लोग मिलते हैं 

इस शहर में नग्नता मिलती है 

मस्ती में डूबे लोगों में मंगनता मिलती है 

फ़िल्मों की नकल करते, एक से बढ़कर एक दुर्बल काया को लंबे बालो में ढकते लोग मिलते हैं 

अगर इस शहर में नहीं मिलता या नहीं मिलती 

तो श्रद्धा नहीं मिलती, विनम्रता नहीं मिलती 

शराफत नहीं मिलती, शहादत नहीं मिलती 

मिलते हैं एक से एक नेता, अभिनेता 

मगर कोई ईसा, नानक, चाणक्य, विवेकानंद, कोई गांधी, नेहरू, शास्त्री नहीं मिलता 

बनावट मिलती है, सजावट मिलती है 

दिखावट मिलती है, खोखला पन मिलता है 

ठोसत्व नहीं मिलता, गहनता नहीं मिलती 

आंतरिकता नहीं मिलती 

इस शहर में सब कुछ मिलता है 

मगर कुछ नहीं मिलता।  



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy