STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Crime Others

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Crime Others

इंसाफ की पुकार

इंसाफ की पुकार

2 mins
415

प्रियंका बहिन को इंसाफ दिलाना है

हैवानों को सरेआम सूली लटकाना है

मौत देनी इन दरिंदो को इस कदर

रूह भी कांपने लगे उनकी थर थर

उनके जिस्म को जीते जी ही जलाना है

जिस सीने से कभी उन्होंने दूध पिया था

उसी सीने को आज छलनी छलनी किया है

उन कुपूतो का आज नामो निशां ही मिटाना है

प्रियंका बहिन को इंसाफ दिलाना है


जिस्म के साथ रूह भी जलाई कमीनों ने 

इस दुष्कृत्य के लिये 

उन दरिंदो को गरम सरिया पर सुलाना है

पराली जलाने पर बहुत हंगामा करते हो

अपनी बहिन के लिये कुछ नही करते हो

दो आंसू नही

दीदी के लिये मोमबत्ती नहीं

उन हैवानों के जिस्म को जलाना है

प्रियंका बहिन को इंसाफ दिलाना है


जिस देश में पहले कभी नारी की पूजा होती थी

आज वहीं उसके साथ दुष्कर्म की पुनरावृत्ति होती है

समाज में फैली घटिया मानसिकता को,

लोगो के दिल से मिटाना है

अपनी बहिन, बेटी की आबरू बचाने के लिये

एक नारी के सम्मान के लिये

उन कातिलों को

सूली पर चढ़ाने का फरमान लाना है

प्रियंका बहिन को इंसाफ दिलाना है


भविष्य में ये गलती फ़िर कभी न हो

ऐसा कानून हमें लाना है

एक छोटी से छेड़छाड़ की सज़ा के लिये

भरे बाज़ार में जूते लगाना है

वो खुदा भी रोया बहुत होगा

लड़की को बनाकर वो भी सोया न होगा

हमे आज लड़कियों को इंसाफ दिलाना है

हर लड़की को अपनी मां, बहिन समझकर

उन मां के गद्दारों को

मिसाइल से 

टुकड़े टुकड़े कर

चील-कौओं को खिलाना

प्रियंका बहिन को इंसाफ दिलाना है


फ़ेसबुक, व्हाट्सप, शब्दों से

नहीं देनी है मुझे श्रद्धांजलि

मुझे तो तुझे जलाने वालो को

तेरे साथ दुष्कर्म करनेवालो को

आज इसी क्षण उन्हें 

सरेआम फांसी पर लटकाना है

प्रियंका बहिन को इंसाफ दिलाना है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Crime