राजनीति में हर कोई होशियार हैं, हर नेता चोरी करने को तैयार हैं, तब क्या चोरी करना सही बात है II राजनीति में हर कोई होशियार हैं, हर नेता चोरी करने को तैयार हैं, तब क्या चोरी क...
सुनो ! अब क्या राज़ है इस कत्ल ए दास्तां का कातिल दो नहीं, तीन थे एक "नन्हीं" जां का। सुनो ! अब क्या राज़ है इस कत्ल ए दास्तां का कातिल दो नहीं, तीन थे एक "नन्हीं" ...
कभी दहेज, रिवाजों का, कभी जबरदस्ती कभी बलात्कार का शिकार बनाया जाता है कभी दहेज, रिवाजों का, कभी जबरदस्ती कभी बलात्कार का शिकार बनाया जाता है
बेटी लक्ष्मी होती है लिखा था एक दीवार पर। बेटी लक्ष्मी होती है लिखा था एक दीवार पर।
जीवन में अगर खुश रहना है कभी रूप न अपना बदलना है । जीवन में अगर खुश रहना है कभी रूप न अपना बदलना है ।
निर्भया और दिसा तो दूर कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू क्रूर। निर्भया और दिसा तो दूर कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू क्रूर।
सारे अरमान कुचल दिए गए मुझे मसल दिया गया वहशी दरिंदों तुमने एकबार भी न सोच मेरी तरह तुम्हारी भी तो... सारे अरमान कुचल दिए गए मुझे मसल दिया गया वहशी दरिंदों तुमने एकबार भी न सोच मेर...
बेची किताबें तब रोटी लाया, पर छोटी को नहीं दूध मिला। बेची किताबें तब रोटी लाया, पर छोटी को नहीं दूध मिला।
एक छोटे से वायरस ने, यूँ कर दी तालाबंदी है.. एक छोटे से वायरस ने, यूँ कर दी तालाबंदी है..
प्यार ने भी प्यार को, इसका एहसास न होने दिया। प्यार में प्यार ही तड़पता रह गया। प्यार ने भी प्यार को, इसका एहसास न होने दिया। प्यार में प्यार ही तड़पता रह गया।
आखिर इन शब्दों को ही क्यों बनाया ? दुनिया को कैसे बनाया है, आखिर इन शब्दों को ही क्यों बनाया ? दुनिया को कैसे बनाया है,
पढ़ाई-लिखाई बेकार जिन्दगी तबाह कर लेतें हैं। पढ़ाई-लिखाई बेकार जिन्दगी तबाह कर लेतें हैं।
झूठ के खिलाफ आवाज उठाना चाहता हूँ, मैं अपने विचारों को आजादी देना चाहता हूँ। झूठ के खिलाफ आवाज उठाना चाहता हूँ, मैं अपने विचारों को आजादी देना चाहता हूँ।
दुल्हन की तरह है सजाया गया सोलह सिंगार पूरा कराया गया। दुल्हन की तरह है सजाया गया सोलह सिंगार पूरा कराया गया।
पूछ रहा... स्त्री क्या कोई वस्तु है? उपभोग किया फिर जला दिया निर्भया पुनः दोहरा कर तुमने जड़ चेत... पूछ रहा... स्त्री क्या कोई वस्तु है? उपभोग किया फिर जला दिया निर्भया पुनः दोह...
सब प्रथा लड़कियों के लिए ही बनी है तो इससे अच्छा है कि उन्हें मार डालो। सब प्रथा लड़कियों के लिए ही बनी है तो इससे अच्छा है कि उन्हें मार डालो।
अगर बेटा काबू से बाहर है तो गलती मां बाप की है। अगर बेटा काबू से बाहर है तो गलती मां बाप की है।
चलते-फिरते जिस्मों से भी सडी़-मानसिकता की गन्दी बास है आती, कुंठित समाज के लोग जागेगे नहीं, क्यूँकि... चलते-फिरते जिस्मों से भी सडी़-मानसिकता की गन्दी बास है आती, कुंठित समाज के लोग ...
भगवान भरोसे बैठने से सफलता कभी मिल सकती नहीं। भगवान भरोसे बैठने से सफलता कभी मिल सकती नहीं।