Sreemanthula Manorama Jyotshna
Crime Others
क्यों क्यों
क्या है वजह
क्या है मेरा गुनाह
सहती हूॅं इसलिए
हर महीना रक्त बहती हूॅं इसलिए
निर्भया और दिसा तो दूर
कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू क्रूर।
धरती माँ
अक्रम
प्यार
लड़की
मत सोचना कि ये नमक सुंदर रंगों से हीन है, पानी के आगे भी ये बेबस और शक्तिहीन है। मत सोचना कि ये नमक सुंदर रंगों से हीन है, पानी के आगे भी ये बेबस और शक्तिहीन ...
सह न पाएगी 'आईना'- फ़ासिले नहीं मील करना। सह न पाएगी 'आईना'- फ़ासिले नहीं मील करना।
मजबूर लाचार, औरतों को कर, देते हे मजबूर मजबूर लाचार, औरतों को कर, देते हे मजबूर
अब उन्हें इस दोहरी बहरूपिये की भूमिका पर कौन टोक सकता है ? अब उन्हें इस दोहरी बहरूपिये की भूमिका पर कौन टोक सकता है ?
पंखुड़ियां भी नहीं, रहती मेरी बिखरी बिखरी हो जाती हैं ये पंखुड़ियां भी नहीं, रहती मेरी बिखरी बिखरी हो जाती हैं ये
करते है जो दहेज प्रथा का विरोध उन्हें। पिछड़ा हुआ मनुष्य बताने लगे है लोग।। करते है जो दहेज प्रथा का विरोध उन्हें। पिछड़ा हुआ मनुष्य बताने लगे है लोग।।
हाँ,बस आज-कल अपना, वक़्त कुछ गलत चल रहा हे। हाँ,बस आज-कल अपना, वक़्त कुछ गलत चल रहा हे।
नीयत खराब ना हो तो कुछ नहीं होता यूँ ही कातिल के हाथ में खंज़र नहीं आता। नीयत खराब ना हो तो कुछ नहीं होता यूँ ही कातिल के हाथ में खंज़र नहीं आता।
सारी रात उस एहसास के तिलिस्म में हम संवरते रहे। सारी रात उस एहसास के तिलिस्म में हम संवरते रहे।
क्या खता थी मेरी जो कोख से मुझको गिरा दिया। क्या खता थी मेरी जो कोख से मुझको गिरा दिया।
शोध बोध उत्कर्ष सत्कार जीवन मौलिक मूल्य व्यवहार।। शोध बोध उत्कर्ष सत्कार जीवन मौलिक मूल्य व्यवहार।।
धुंध निशाचर कर लेते फिर से बस्ती पर पहरा धुंध निशाचर कर लेते फिर से बस्ती पर पहरा
घिन आती है मुझे मेरे ऊपर , कैसे पैदा कर दी मैं ऐसे जानवर। घिन आती है मुझे मेरे ऊपर , कैसे पैदा कर दी मैं ऐसे जानवर।
धरा फोड़ जैसे अंकुर निकलता व्यक्तित्त्व ज्ञान से निखरता हो। धरा फोड़ जैसे अंकुर निकलता व्यक्तित्त्व ज्ञान से निखरता हो।
धोखा तो पता ही नहीं था समझो किसी बेवफा पे मरता ही जा रहा था धोखा तो पता ही नहीं था समझो किसी बेवफा पे मरता ही जा रहा था
न जाने क्यों लड़के के ऊपर कोई आरोप क्यों न लगाया था? न जाने क्यों लड़के के ऊपर कोई आरोप क्यों न लगाया था?
आए हो मेरी जिन्दगी में तुम एक शाप बन के आए हो मेरी जिन्दगी में तुम एक शाप बन के
अब पति के लिए मुसीबत बन चुकी थी हर संबंधियों के सामने इज्जत झुकी थी अब पति के लिए मुसीबत बन चुकी थी हर संबंधियों के सामने इज्जत झुकी थी
लेकिन इन आँखों के आँसू तुम्हें अभी याद करते हैं। लेकिन इन आँखों के आँसू तुम्हें अभी याद करते हैं।
जरूरत ही नहीं होती तुम्हें मांगने की खुद जनता बोलती इस बार तुम अब जरूरत ही नहीं होती तुम्हें मांगने की खुद जनता बोलती इस बार तुम अब