Sreemanthula Manorama Jyotshna
Crime Others
क्यों क्यों
क्या है वजह
क्या है मेरा गुनाह
सहती हूॅं इसलिए
हर महीना रक्त बहती हूॅं इसलिए
निर्भया और दिसा तो दूर
कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू क्रूर।
धरती माँ
अक्रम
प्यार
लड़की
बारूद के ढेर पर रख अपनों के सपनों को, क्या वह हासिल करना चाह रहा है? बारूद के ढेर पर रख अपनों के सपनों को, क्या वह हासिल करना चाह रहा है?
कहां गया ये चैन और सुकून जो 200 करोड़ कमाने पर खुश हुए । कहां गया ये चैन और सुकून जो 200 करोड़ कमाने पर खुश हुए ।
तभी एक निर्भया मुक्त समाज का आगाज हो..... तभी एक निर्भया मुक्त समाज का आगाज हो.....
दिन ब दिन बढ़ते हादसे ये पैगाम दे रहे हैं आ गया है घोर कलियुग ये बता रहे हैं। दिन ब दिन बढ़ते हादसे ये पैगाम दे रहे हैं आ गया है घोर कलियुग ये बता रह...
डर की बजाय सिर ऊंचा करके मरना अच्छा होता है।। डर की बजाय सिर ऊंचा करके मरना अच्छा होता है।।
जग की मोह माया में पड़कर ही , अब तक भटक रहा इंसान! अब तक भटक रहा इंसान!!! जग की मोह माया में पड़कर ही , अब तक भटक रहा इंसान! अब तक भटक रहा इंसान!!!
देश में सफेद झूठ की वाहवाही के लिए भेड़िए कविता सुना रहे हैं, देश में सफेद झूठ की वाहवाही के लिए भेड़िए कविता सुना रहे हैं,
फिर लड़नी होगी लड़ाई, मुझे मेरे आत्मविश्वास की .... फिर लड़नी होगी लड़ाई, मुझे मेरे आत्मविश्वास की ....
माँ तेरे आंचल की महक समायी है मेरे हर जज्बात में। माँ तेरे आंचल की महक समायी है मेरे हर जज्बात में।
मैं भी देखूं दुनिया सारी, मुझे भी प्यार पाना है। मैं भी देखूं दुनिया सारी, मुझे भी प्यार पाना है।
है कोई यहां शाप तो नहीं गरीबी में जन्म लेना यहां, है ये कोई पाप तो नहीं। है कोई यहां शाप तो नहीं गरीबी में जन्म लेना यहां, है ये कोई पाप तो नहीं।
ये मैंने माना है फिर भी पुरुष था तू तूने कैसे इन भावों को समर्थन थे दिए तू शिक्षक है अधिवक्ता... ये मैंने माना है फिर भी पुरुष था तू तूने कैसे इन भावों को समर्थन थे दिए त...
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अभियान से ही क्या समाज चल पाएगा ? बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अभियान से ही क्या समाज चल पाएगा ?
कमजोर पर हाथ सेंक तो ले लगेगी आग हाथ सेंक तो ले। कमजोर पर हाथ सेंक तो ले लगेगी आग हाथ सेंक तो ले।
क्या, नारी के प्रति लोगों का रवैया भी बदल रहा है ? क्या, नारी के प्रति लोगों का रवैया भी बदल रहा है ?
तोड़कर एक आशियाना, क्या अपना घर बसाएगा? तोड़कर एक आशियाना, क्या अपना घर बसाएगा?
हर शुभ कामों से था दूर मुझे रखा न मेरी कोई सखी न था कोई सखा, हर शुभ कामों से था दूर मुझे रखा न मेरी कोई सखी न था कोई सखा,
समाज में कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ भेडिये इंसानों की शक्ल में पाए जाते हैं। समाज में कुछ घर ऐसे भी होते हैं, जहाँ भेडिये इंसानों की शक्ल में पाए जाते है...
हम मर मिटे सच्चे इश्क की तलाश में अब कैसे जिएं। हम मर मिटे सच्चे इश्क की तलाश में अब कैसे जिएं।
मत बेचो अपना इमान, डालकर मृत कागज़ों में जान। मत बेचो अपना इमान, डालकर मृत कागज़ों में जान।