Sreemanthula Manorama Jyotshna
Crime Others
क्यों क्यों
क्या है वजह
क्या है मेरा गुनाह
सहती हूॅं इसलिए
हर महीना रक्त बहती हूॅं इसलिए
निर्भया और दिसा तो दूर
कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू क्रूर।
धरती माँ
अक्रम
प्यार
लड़की
अपराध मुक्त भारत के लिए इन्हें अपने घर में बैठाना होगा। अपराध मुक्त भारत के लिए इन्हें अपने घर में बैठाना होगा।
आदत सी हो गयी है अबनज़रअंदाज़ करने की.. आदत सी हो गयी है अबनज़रअंदाज़ करने की..
भूख में धोखा खा कर, शायद पेट भर गया होगा। फल ना सही बारूद सही, भीतर तो गया होगा। भूख में धोखा खा कर, शायद पेट भर गया होगा। फल ना सही बारूद सही, भीतर तो गया हो...
उन गलियों से गुजरना जहाँ मुस्कान ने उन्हें कभी अपना माना ना उन गलियों से गुजरना जहाँ मुस्कान ने उन्हें कभी अपना माना ना
वो दर्द की रात थी... तेज बरसात थी... वो दर्द की रात थी... तेज बरसात थी...
तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए। तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए।
नैतिकता का भारी ओढ़ लबादा नेतागण गलत शासन चला रहे हैं। नैतिकता का भारी ओढ़ लबादा नेतागण गलत शासन चला रहे हैं।
ज्ञान चक्षु खोल के पराई केंद्र आग में तपे सोना कुंदन बन जग झोली भरे गैर ! ज्ञान चक्षु खोल के पराई केंद्र आग में तपे सोना कुंदन बन जग झोली भरे...
बढ़ रही है नफ़रतों की सरहदें, हम फकत करते रहे बर्दाश्त क्या! बढ़ रही है नफ़रतों की सरहदें, हम फकत करते रहे बर्दाश्त क्या!
मैं आम आदमी हूँ, किसी की बहन को बहन नहीं मानता, मैं आम आदमी हूँ, किसी की बहन को बहन नहीं मानता,
आंखोंं में लहू, दिल में चिंगारी मिटा दो यह समाज की महामारी आंखोंं में लहू, दिल में चिंगारी मिटा दो यह समाज की महामारी
गलती कोई और कर रहा है सज़ा किसी और को दिला रहा हूं गलती कोई और कर रहा है सज़ा किसी और को दिला रहा हूं
तेरी बहन तेरे सामने आने से डरेगी, घर क बाहर शैतानों से लड़ती थी, अब घर के अंदर पल रहे तेरी बहन तेरे सामने आने से डरेगी, घर क बाहर शैतानों से लड़ती थी, अब घर के अ...
माँ तो अपना फर्ज निभा रही थी पर इंसान ने कौन सा फर्ज निभाया माँ तो अपना फर्ज निभा रही थी पर इंसान ने कौन सा फर्ज निभाया
अधमरा, फिर उन महान वीरों ने कर दिया। अधमरा, फिर उन महान वीरों ने कर दिया।
आपसी मनमुटावों को समाज से छीपा कर बंद दरवाजे के पीछे नासमझ बच्चों को दिखाते हैं। आपसी मनमुटावों को समाज से छीपा कर बंद दरवाजे के पीछे नासमझ बच्चों को दिखाते ह...
जब लड़कियां घर के अंदर घुट घुट के मरती है, जब एक नन्ही सी जान कोई शोषण के डर से डरती जब लड़कियां घर के अंदर घुट घुट के मरती है, जब एक नन्ही सी जान कोई शोषण के डर...
मेरी चीख भी किसी को सुनाई नहीं दी मां बहुत दर्द में थी मैं मेरी चीख भी किसी को सुनाई नहीं दी मां बहुत दर्द में थी मैं
ज़ो भी नज़ारे होते हैं उन नजरों में हो जाते हैं सब बेकार, हो जाते हैं सब बेकार। ज़ो भी नज़ारे होते हैं उन नजरों में हो जाते हैं सब बेकार, हो जाते हैं सब बेकार...
न्यायालय को दाग लगाने वाले जब तक जिंदा हैं तब तक हम हाथों में ज्वाला लेकर भी शर्मिंदा न्यायालय को दाग लगाने वाले जब तक जिंदा हैं तब तक हम हाथों में ज्वाला लेकर...