Sreemanthula Manorama Jyotshna
Crime Others
क्यों क्यों
क्या है वजह
क्या है मेरा गुनाह
सहती हूॅं इसलिए
हर महीना रक्त बहती हूॅं इसलिए
निर्भया और दिसा तो दूर
कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू क्रूर।
धरती माँ
अक्रम
प्यार
लड़की
मिट्टी भी देश की हा-हाकार कर उठी, बच्ची को तिल-तिल मरते जब देखा... मिट्टी भी देश की हा-हाकार कर उठी, बच्ची को तिल-तिल मरते जब देखा...
तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए। तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए।
नहीं जिंदगी है सँवारी किसी की । निजी ही बनाने जलाने लगे हैं॥ नहीं जिंदगी है सँवारी किसी की । निजी ही बनाने जलाने लगे हैं॥
जिस दिन मन भर जाना उसका, गिन लेगा बेकारों में। जिस दिन मन भर जाना उसका, गिन लेगा बेकारों में।
खून खौल उठता है मेरा, आँख से आंसू बहते है एक बच्ची की स्मिता लुटी है, कैसे हम सब चुप बैठे है? ... खून खौल उठता है मेरा, आँख से आंसू बहते है एक बच्ची की स्मिता लुटी है, कैसे हम स...
नैतिकता का भारी ओढ़ लबादा नेतागण गलत शासन चला रहे हैं। नैतिकता का भारी ओढ़ लबादा नेतागण गलत शासन चला रहे हैं।
जाने कितनों को मारा, कितनों को अनाथ किया ना जाने कितने बच्चों का,जीवन उसने बर्बाद किया जाने कितनों को मारा, कितनों को अनाथ किया ना जाने कितने बच्चों का,जीवन उसने बर...
बढ़ रही है नफ़रतों की सरहदें, हम फकत करते रहे बर्दाश्त क्या! बढ़ रही है नफ़रतों की सरहदें, हम फकत करते रहे बर्दाश्त क्या!
उठा कृपाण धड़ से अलग कर गर्दन को मत कानून की तू परवाह कर फैसला कर अपने हाथों से उठा कृपाण धड़ से अलग कर गर्दन को मत कानून की तू परवाह कर फैसला कर अपने ह...
उसके चेहरे पर गिरे वो तेज़ाब के बुलबुले थे, किस हद तक तड़पी होगी उसके चेहरे पर गिरे वो तेज़ाब के बुलबुले थे, किस हद तक तड़पी होगी
जला दे उन हाथों को, जिसने फूंके तेरे पंख हैं जला दे उन हाथों को, जिसने फूंके तेरे पंख हैं
दहेज लोभी संसार में, दहेज की भेंट चढ़ी थी, न्याय यहां मिलेगा नहीं, सो ईश्वर के दरबार ग दहेज लोभी संसार में, दहेज की भेंट चढ़ी थी, न्याय यहां मिलेगा नहीं, सो ईश्वर क...
दबाये बैठे हैं न जाने कितनों का हक... लाखों खर्च करके भंडारे कर रहे हैं। दबाये बैठे हैं न जाने कितनों का हक... लाखों खर्च करके भंडारे कर रहे हैं।
आपसी मनमुटावों को समाज से छीपा कर बंद दरवाजे के पीछे नासमझ बच्चों को दिखाते हैं। आपसी मनमुटावों को समाज से छीपा कर बंद दरवाजे के पीछे नासमझ बच्चों को दिखाते ह...
कैसे करते हैं दुनिया वाले खुद को बेमिसाल, हमें तो तुम बदनाम ही रहने दो कैसे करते हैं दुनिया वाले खुद को बेमिसाल, हमें तो तुम बदनाम ही रहने दो
ख़राबी बस यही हर मुल्क के नक़्शे में रहती है। ख़राबी बस यही हर मुल्क के नक़्शे में रहती है।
तिमिरलोक, ये जलमंडल है, मैं जिस घर में सोई हूँ । तिमिरलोक, ये जलमंडल है, मैं जिस घर में सोई हूँ ।
मेरे तन पर वस्त्र नहीं, या है पूरा समाज अर्धनग्न ! मेरे तन पर वस्त्र नहीं, या है पूरा समाज अर्धनग्न !
अंत ना करो बेदर्दी से आने दो इस जग में छाने दो इस जग में। अंत ना करो बेदर्दी से आने दो इस जग में छाने दो इस जग में।
मेरी चीख भी किसी को सुनाई नहीं दी मां बहुत दर्द में थी मैं मेरी चीख भी किसी को सुनाई नहीं दी मां बहुत दर्द में थी मैं