STORYMIRROR

Ritu Dahate

Crime Others

4  

Ritu Dahate

Crime Others

केरल की गर्भवती हथिनी

केरल की गर्भवती हथिनी

1 min
400

किस हद तक गिर गया इंसान 

इंसान के अंदर कि इंसानियत तक मिट गयी 

कैसे एक बेजुबा माँ कि हत्या कर दी 


रूह नहीं कापी इनकी कि जानवर से बद्दतर हो गया इंसान

अन्नानास में फटाका खिला दिया हथनी को 


माँ तो बेचारी पल रहे बच्चे कि भूख मिटाने निकली थी 

क्या उसकी यही गलती थी इंसान पर भरोसा कर लिया 


माँ तो अपना फर्ज निभा रही थी 

पर इंसान ने कौन सा फर्ज निभाया 


एक माँ सजा रही थी सपने माँ बनने के लिए 

भूख की आग थी उसमें, उसको ही आग लगा दिया


बच्चा भी बोल पड़ा माँ से तूने मेरे लिए अपनी जान गवा दी माँ

मुझे इंसाफ चाहिए माँ तेरे लिए क्या मैं तेरा गुनहगार हो गया

जो तू ये इंसानों कि बस्ती में चली गयी 


तूने तो किसी को नुकसान भी नहीं पहुँचाया 

फिर भी तुझे जान गवानी पड़ी मिला 

मुझे इंसाफ चाहिए माँ इन दरिन्दो को मौत कि सजा देना 


एक जानवर की मौत नहीं हुई 

मानव ने खुद को मारा है 

इस धरती पर जीतना हक इंसान का है 

उतना ही जानवर का है 


भगवान माँ और बच्चे की आत्मा को शांति दे


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Crime