STORYMIRROR

S N Sharma

Romance Tragedy Fantasy

4  

S N Sharma

Romance Tragedy Fantasy

हर आहट कहती है।

हर आहट कहती है।

1 min
399

सुनसान रातों में 

सूनी सूनी सड़कों पर।

आते जाते कदमों की आहट।

सुनता रहता है मेरा बेताब मन।


मैं यह जानता हूं कि ये तुम नहीं हो।

फिर भी मन कहता है कि तुम यही हो।

भले ही हवा देती है मेरे दरवाजे पर एक थाप

मुझे एहसास होता है यह शायद तुम ही हो।


एक अरसा हुआ मुद्दत बीती तुम्हें देखे हुए।

यह नाराजगी छोड़ो और अब तो लौट भी आओ।

तुम्हारे इंतजार में व्याकुल है मेरा मन चली आओ 


हर आहट कहती है कि कहीं यह तुम्हीं तो नहीं।

जबकि सच में तुम यहां पर कहीं भी हो ही नहीं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance