हमारा बड़प्पन तो हर कोई
हमारा बड़प्पन तो हर कोई
हमारा बड़प्पन तो हर कोई देखता है।
लेकिन अपनी शर्म सिर्फ़ हम देख पाते हैं।
हमारी हँसी की आवाज़ तो हर कोई सुनता है।
लेकिन अपना ख़ामोश ग़म सिर्फ़ हम झेल जाते हैं।
सही भी है, अपना ग़म कहने से फ़ायदा क्या है।
लोग ग़म सुनते हैं और फिर हँसी उड़ाकर जाते है।
हमने कुछ लोगों को हमदर्द बनते हुए देखा है।
वे हमदर्द ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द देकर जाते हैं।
जिनको कभी हमने अपना हमसफ़र समझा है।
वही तो हमें अंजानी राह के बीच छोड़कर जाते हैं।
जिनका गुलिस्तां सजाते हुए उम्र गुज़र जाती है।
वे ही हमें दर दर की ठोकरें देकर मुंह मोड़ जाते हैं।
कभी जिनके लिए हमने फूलों की सेज सजाई थी।
वही हमें कांटों से भरे बिछौने पर लिटाकर जाते हैं।
कुछ लोग गैर बेगाने अजनबी ही अच्छे होते हैं।
वे बिना किसी मतलब सहारा बन खड़े हो जाते हैं।
हमेशा ख़्याल रखना कि सबकी परवाह तो रहे।
मगर ज़िन्दगी में सेहत और पैसा बहुत काम आते हैं।
ज़िंदगी में यह फलसफ़ा जो लोग याद रखते हैं।
वही लोग ज़िंदगी को भरपूर खुशी से जीकर जाते हैं।
