STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Tragedy Action Thriller

4  

Kanchan Prabha

Tragedy Action Thriller

हिरण्याक्ष का अन्त

हिरण्याक्ष का अन्त

1 min
257


हिरण्यकशिपु का भाई हिरण्याक्ष 

करता देवताओं का हर पल ह्रास

 

बड़ा दुष्ट था उसका विचार

बेगुनाहों पर करता वार


उसकी नीयत बड़ी बुरी थी

दैत्यों से हर तार जुड़ी थी


तपस्या कर वरदान जो पाया

उसी पर सबको खूब नचाया


माँ थी उसकी अभागिन दिति

समझ ना पाई समय की नीति


पिता थे उसके महर्षि कश्यप

करते रहते भक्ति और तप 


उपद्रव बढ़ता गया था जब

अन्त समय भी आया तब 


वाराह अवतारी विष्णु फिर आये

महल से उसको दूर भगाये


अन्त हुआ फिर उस दानव का

उल्लास भरा दिन आया मानव का


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy