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Dinesh Dubey

Tragedy

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Dinesh Dubey

Tragedy

गुजरती गई मेरी जिंदगी

गुजरती गई मेरी जिंदगी

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गुजरती गई मेरी जिंदगी 

यूं ही तमाम होकर ,

सोचा था कुछ ,हुआ कुछ ,

करना था कुछ, हो गया कुछ ,


रास्ते ऐसे ही बदलते गए,

किस्मत भी रोज टालती रही ,

दूसरो से कोई गिला न था ,

अपने ही पैर कुतरते रहे ,


सोचा था जो करने के लिए ,

वह भी मैं कर ना सका ,

किससे करु शिकवा शिकायत ,

जब अपने ही रुख बदलते रहे ,


मौसम भी बदलता है वक्त पर ,

पर इंसान बदलते हैं हर दम ,

किस पर भरोसा करे अब ,

जब अपना ही साया साथ ना दिया।



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