STORYMIRROR

संजय असवाल "नूतन"

Fantasy

4  

संजय असवाल "नूतन"

Fantasy

एक कविता तुम पर !

एक कविता तुम पर !

1 min
386

काश मैं लिख पाता

एक कविता तुम पर 

तुम्हारी लाज शर्मो हया पर

तेरी मीठी मीठी बातों पर

जो कानों में मिश्री सा रस घोल देती है

फिजा में रंगीनियत भर देती है।

तुम्हारी हर अदा पर 

तुम्हारे गुलाबी होंठों पर 

जिसे देख मेरी सांसें थमने लगती है 

तेरे चेहरे पर नजर जमने लगती हैं।।

तेरी हर शोखियों पर 

चेहरे से टपकती बूंदों पर 

जो मोतियों से झरझर बहने लगते हैं 

अपनी एक कहानी कहने लगते हैं।

तेरे चंचल चितवन नैनों पर 

तेरे गले में पहने गहनों पर 

जो तेरे सामने फीके लगते हैं 

तुझसे बातें करने लगते हैं।।

तेरे कानों की बालियों पर

सुर्ख लाल गुलाबी गालों पर

जिस पर मैं दिल हार जाता हूं

तेरा बस तेरा हो जाता हूं।

तेरी हिरनी जैसी चाल पर 

लहराते घने बालों पर 

जो तेरी हर अदा पर मस्त झूमने लगते हैं 

मुझे इशारे करने लगते हैं।।

तेरे मखमली बदन पर 

तेरे सुराही जैसी गर्दन पर 

जो लोच पैदा होती है बिजलियां गिराती है

कयामत सा ढा देती है ।

तेरी छुअन पर 

तेरे मदमस्त यौवन पर 

जिसकी बात ही निराली है 

आशिकों को हरदम जलाने वाली है।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy