एक आईना है हमारे और ख़ुदा के दरमियां,
एक आईना है हमारे और ख़ुदा के दरमियां,
बात छोटी सी है,
समझाती हूँ यूँ समझिए,
एक आईना है हमारे और ख़ुदा के दरमियां,
जो मुस्कुरायेंगे तो मुस्कुराहटें लौट आयेंगी,
मन में अंधेरे होंगे तो अँधेरे ही बिखर जायेंगे,
तो दुआओं की रोशनी ख़ुदा तक पहुँचा दीजिए,
उम्मीदों का दामन फैला दीजिए फिर,
ख़ुदा की रहमत का मज़ा लीजिए,
अश्क़ आँखों से पोंछ लीजिए,
साहिब, इंतजार कर रहा है आईना,
एक बार मुस्कुरा दीजिए"
