दो धर्मों के त्यौहार
दो धर्मों के त्यौहार
ओह, आज फिर दो धर्मों के त्यौहार हैं एक साथ
कभी भी कुछ भी हो सकता है
शहर में पुलिस ही पुलिस, धारा 144
दंगे की आशंका
अवकाश था, घूमने का मन था
लेकिन करे तो क्या करें
दरवाजा बंद किया और रिमोट का बटन दबाने लगा
कभी ये चैनल कभी वो चैनल
बाहर पुलिस के सायरन
कुछ मारो, काटो की आवाजें, कुछ नारों के नक्कारे
पुलिस को गोली चलाने के आदेश
खिड़की भी बंद करनी पड़ी और
सोने का उपक्रम करने लगे न चाहते हुए भी।
