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Devendraa Kumar mishra

Tragedy

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Devendraa Kumar mishra

Tragedy

दो धर्मों के त्यौहार

दो धर्मों के त्यौहार

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ओह, आज फिर दो धर्मों के त्यौहार हैं एक साथ 

कभी भी कुछ भी हो सकता है 

शहर में पुलिस ही पुलिस, धारा 144 

दंगे की आशंका 

अवकाश था, घूमने का मन था 

लेकिन करे तो क्या करें 

दरवाजा बंद किया और रिमोट का बटन दबाने लगा 


कभी ये चैनल कभी वो चैनल 

बाहर पुलिस के सायरन 

कुछ मारो, काटो की आवाजें, कुछ नारों के नक्कारे 

पुलिस को गोली चलाने के आदेश 

खिड़की भी बंद करनी पड़ी और

सोने का उपक्रम करने लगे न चाहते हुए भी।


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