Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021
Drama
हमें भी प्यार जताना
आता है
पर चुपके -चुपके से
इजहार करना आता है।
उम्र का तकाजा है भाई
हम खुल के
नहीं बोलते हैं
पर प्यार करना
हमको भी आता है !
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सपनों में आकर सताता है मुझ को, रुबरु मिले तब रुलाता है मुझ को, सपनों में आकर सताता है मुझ को, रुबरु मिले तब रुलाता है मुझ को,
हम चाह कर भी इश्क को नाम ना दे पाए। हम चाह कर भी इश्क को नाम ना दे पाए।
कहीं कागज़ पर व्यथित शब्दों की चीत्कार हूँ , कहीं कागज़ पर व्यथित शब्दों की चीत्कार हूँ ,
कि आ जाओ फिर से ज़हन में मेरे और, रुसवा करो मुझे, मेरी कोई ख़ता रही है। कि आ जाओ फिर से ज़हन में मेरे और, रुसवा करो मुझे, मेरी कोई ख़ता रही है।
वक्त बहलाने को बस जैसे साथी हमें उसने बना लिया । वक्त बहलाने को बस जैसे साथी हमें उसने बना लिया ।
हमारे जज़्बातों को समझ सके सब अपने छलावे की दुनिया मग्न है हमारे जज़्बातों को समझ सके सब अपने छलावे की दुनिया मग्न है
तुम्हारे लिए वक़्त बहुत हैं मुझे समय फिसलता दिखायी देता हैं तुम्हारे लिए वक़्त बहुत हैं मुझे समय फिसलता दिखायी देता हैं
पैकेट को रास्ते में फेंक देते है क्यों की कोई दूसरा कचरा उठाये पैकेट को रास्ते में फेंक देते है क्यों की कोई दूसरा कचरा उठाये
धोखे बाज कह देते उन्हें पर कभी ऐसे शब्द ना मिले धोखे बाज कह देते उन्हें पर कभी ऐसे शब्द ना मिले
तुम हमसे मोहब्बत करते हो बेशुमार। तुम हमसे मोहब्बत करते हो बेशुमार।
हमने तो अपने आस पास खयालों की दुनिया बसाई थी हमने तो अपने आस पास खयालों की दुनिया बसाई थी
मैं अब कोई निपट मिथ्या भरम नहीं साकार हूँ, मैं अब कोई निपट मिथ्या भरम नहीं साकार हूँ,
कल कल करती नदियां, हरी चुनर ओढ़े हर तरफ से वादियां बुला रही है। कल कल करती नदियां, हरी चुनर ओढ़े हर तरफ से वादियां बुला रही है।
उसको पाया तो पूर्ण हुआ, खुद मां और मुझको पिता बनाती है।। उसको पाया तो पूर्ण हुआ, खुद मां और मुझको पिता बनाती है।।
न तरसाना अब सनम मुझे, तेरे इश्क की प्यास है। न तरसाना अब सनम मुझे, तेरे इश्क की प्यास है।
दिल जलता तो रहा मगर फिर धड़क नहीं पाया दिल जलता तो रहा मगर फिर धड़क नहीं पाया
कुछ साहिल अपने लिए खरीदने हैं मुझे। कुछ साहिल अपने लिए खरीदने हैं मुझे।
सहज के रखना न आया ख्वाबों के महल को, सहज के रखना न आया ख्वाबों के महल को,
जो पुरुष बहन बेटी का अपमान करे, वह आज का रावण है। जो पुरुष बहन बेटी का अपमान करे, वह आज का रावण है।
ज़रा रुको, थोड़ा सांस लो। ज़रूरी है थोड़ा आराम भी। ज़रा रुको, थोड़ा सांस लो। ज़रूरी है थोड़ा आराम भी।