Me Mahishwar
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पढ़ कर दो चार लफ्ज़ किताबों से,
मुकम्मल करना पूरा जहां चाहता है,
मैं जितना चाहती हूँ उसे,
वो मुझे उतना कहां चाहता है।।
ये मेरा वक्त है जो वो मुझे ही नहीं देता,
खुद वो शांत सागर सा है और
मुझमें तूफानों सा तेज़ हवा चाहता है।।
हयात
एक शख्स चाहिए
और क्या करती
चाहत
याद
नया साल
ले गया सब कुछ...
वो गैरों को च...
मुझे हो रहा ह...
मेरा शराबी या...
मेरे अधीर यौवन को अब तुम, क्यों जगाने आए हो? मेरे अधीर यौवन को अब तुम, क्यों जगाने आए हो?
तुम हुए मुझमें यूँ विलय हर भाव तुम्हीं से बोऊँ, मैं, तुम हुए मुझमें यूँ विलय हर भाव तुम्हीं से बोऊँ, मैं,
अब तेरा मेरा मिलन नही या मै हिन्दू या तुम मुस्लिम! अब तेरा मेरा मिलन नही या मै हिन्दू या तुम मुस्लिम!
खुल्ली किताब बनकर बैठे हैं मेरे ख्वाब, उन्हे सुनकर मुझे तुम्हे सुनाने है आज। खुल्ली किताब बनकर बैठे हैं मेरे ख्वाब, उन्हे सुनकर मुझे तुम्हे सुनाने है आज।
शब्द रूपी माला में बिंधकर अंकित रहेंगे मेरी कविताओं में। शब्द रूपी माला में बिंधकर अंकित रहेंगे मेरी कविताओं में।
दुखों को दूर कर न जाने कब हमसफर बन गया, सभी ग़मों को भूलकर खुशियों के फूल खिल गया, दुखों को दूर कर न जाने कब हमसफर बन गया, सभी ग़मों को भूलकर खुशियों के फूल खिल ...
तेरा जिक्र हुआ मेरी आंख भर आई आपकी याद आई! तेरा जिक्र हुआ मेरी आंख भर आई आपकी याद आई!
नर्म सुबह सुहानी हुुई है सखी घर आए मेरे प्रवासी।। नर्म सुबह सुहानी हुुई है सखी घर आए मेरे प्रवासी।।
जाने कब आएगाा वह दिन, जब एहसास होगा तुम्हें मेरी मोहब्बत का! जाने कब आएगाा वह दिन, जब एहसास होगा तुम्हें मेरी मोहब्बत का!
ना देखें कभी शक भरी निगाहों से.. दिल से दिल का एहसास समझे। ना देखें कभी शक भरी निगाहों से.. दिल से दिल का एहसास समझे।
साथ थी हूँ और हमेशा रहूंगी, हर दर्द सिर्फ तेरे लिये सहूंगी, साथ थी हूँ और हमेशा रहूंगी, हर दर्द सिर्फ तेरे लिये सहूंगी,
जीवन की एक नयी नयी परिभाषा लगते हो। जीवन की एक नयी नयी परिभाषा लगते हो।
इश्क़ बेसबब है जो होता है तो बस हो जाता है! इश्क़ बेसबब है जो होता है तो बस हो जाता है!
तुम जो रूठे हो तुम्हें मनाऊं कैसे तुम्हें ऐसे छोड़कर नौकरी जाऊं कैसे। तुम जो रूठे हो तुम्हें मनाऊं कैसे तुम्हें ऐसे छोड़कर नौकरी जाऊं कैसे।
मैं इंतजार करता रहता हूँ तुम्हारा, रात-रात जागकर। मैं इंतजार करता रहता हूँ तुम्हारा, रात-रात जागकर।
अब जीना मुझे प्रतिक्षण यहाँ मौत सा प्रतीत होने लगा हैं। अब जीना मुझे प्रतिक्षण यहाँ मौत सा प्रतीत होने लगा हैं।
और मेरेतुम्हारे मित्रता और प्रेम की, इक अदृश्य सी गांठ? और मेरेतुम्हारे मित्रता और प्रेम की, इक अदृश्य सी गांठ?
बढ़ रही ठंड में गुनगुनी धूप सी तुम! बढ़ रही ठंड में गुनगुनी धूप सी तुम!
मेरे जीवन में रंग भरे कोई,,, क्या ऐसा रंग संभव होगा।। मेरे जीवन में रंग भरे कोई,,, क्या ऐसा रंग संभव होगा।।
उस सावन.. में था, सृजन जीवन का उस सावन.. में था, सृजन जीवन का