Be a part of the contest Navratri Diaries, a contest to celebrate Navratri through stories and poems and win exciting prizes!
Be a part of the contest Navratri Diaries, a contest to celebrate Navratri through stories and poems and win exciting prizes!

Sweta Mahi

Romance


3  

Sweta Mahi

Romance


ले गया सब कुछ मेरा जाते जाते

ले गया सब कुछ मेरा जाते जाते

1 min 192 1 min 192

आशिक की आशिक़ी भी,बची खुची दिल्लगी भी,

जाते जाते वो सब ले गया,अपनी गज़ले भी,मेरी शायरी भी

एक दरिया थी उसकी यादें,निकलते निकलते डूबी कश्ती भी,

मैंने उस रोज आखरी बार देखा उसे,दिल रोया और रोई आंखे भी।

घर आते वक्त पैर थरथरा रहे थे,अटक रही थी सांसे भी,

कुछ तो खत्म हुआ था मुझमे,एक बार ये पूछा मां ने भी

हर राह पलके बिछाया मैंने,सब खोया क्या पाया मैंने,

हर कोशिश मुक्कमल नही होती,ये जानने में लगे कुछ महीने भी

उसकी बाहों में बिखर सी जाने वाली मैं,

उसकी खुशी से निखर सी जाने वाली मैं,

एक बार निकली तो पलटकर नही देखा उसे,

हाँ रात भर जगती रही कुछ हफ्ते भी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sweta Mahi

Similar hindi poem from Romance