STORYMIRROR

बस दूर से निहार लेना

बस दूर से निहार लेना

1 min
27K


मैं अगर आऊँँ तेरी गलियों में

बारिश बनकर तो तू हाथों में

उसकी बूँद लेकर

खुद को सँवार लेना,


और जब मैं घटा की फुहार बन

गुज़रने लगूंं तो बस तू

मुझे हल्की आवाज़ से पुकार लेना,

अबकी बार भी तुम मुझे

बस दूर से निहार लेना।


मेरे जाने के बाद

अगर चाहो तुम तो

बेवफाई के लिबास में

गैरों से खत हज़ार लेना,


मगर जब तुम्हें बेकरारी का

आलम सताए तो तुम

बूँदों से नदी बनने का

सबर उधार लेना,

अबकी बार भी तुम मुझे

बस दूर से निहार लेना।


पर जब बारिश थमने के बाद

दीदार हो हमारा तो तुम

बूँदों के सारे कर्ज़ उतार देना,

मगर कुछ झिझक के साथ पलकें झुकाकर

तुम मुझे स्वीकार लेना,

अबकी बार भी तुम मुझे

बस दूर से निहार लेना।

अबकी बार भी तुम मुझे

बस दूर से निहार लेना...!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama