बर्ताव की स्याही ~simmi negi
बर्ताव की स्याही ~simmi negi
बर्ताव सबके याद है मुझे
कौन कब कैसे बदला था
कौन हंसकर जख्म दे गया
कौन रो कर अपना बता गया
साथ रहने को माफी न समझना
मैंने सीख लिया है अब
चेहरे पर मुस्कान रखना
और दिल से हिसाब रखना
कुछ लोग मिलते हैं सहारा बन कर
उजाड़ कर चले जाते हैं तूफान बन कर
कुछ दुआ बनकर आते हैं
बिना कहे संभाल जाते हैं
मैं नफरत नहीं करती अब किसी से
बस फर्क समझ गई हूं
कौन अपना था कौन पराया
और कौन बस वक्त गुजार गया
