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Simmi Negi

Tragedy

4.8  

Simmi Negi

Tragedy

खामोशी का सफर

खामोशी का सफर

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मैं जिंदा लाश हूँ, फिर भी जिंदगी जी रही हूँ,
दिल में आग लगी है, पर साँसें अब भी चल रही हैं।

चेहरे पर उधार की हँसी, आँखों में खामोशियाँ,
दुनिया को दिखाना है, मैं खुशी से जी रही हूँ।

रातें काटती हैं जैसे कोई लंबी सज़ा सी हो,
सुबह होती है खामोशी के साए में डूबी-डूबी।

किसी दिन ये अंधेरा भी खत्म हो जाएगा,
कोई सुबह मेरी भी सुहानी हो जाएगी।

सहारा न सही, हिम्मत तो है ,
मैं टूटी हूँ, पर हारी नहीं हूँ।

खामोशियों में डूबी हूँ, दर्द गहरा है
दुनिया के पास सहारा है, मैं बेसहारा हूं 


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