STORYMIRROR

Simmi Negi

Children Stories Thriller Children

4.5  

Simmi Negi

Children Stories Thriller Children

वीरान मंदिर

वीरान मंदिर

1 min
27

अपने स्कूल को देखा आज,  
पहचान ही नहीं पाया मैं।  
जहाँ हँसते खेलते थे हम,  
वहाँ खामोशी रोता है।  

दीवारों का रंग उड़ गया,  
दरवाज़े से घास उग आई।  
जो मंदिर था बचपन का,  
आज वीरान क्यों हो गई?  

मन करता है पूछूँ इससे,  
कहाँ गए वो दोस्त पुराने?  
कहाँ गई वो घंटी की आवाज़,  
जो दिल को सुकून पहुँचाती थी?  

बुरा हाल देख के इसका,  
आँख भर आई मेरी।  
ये स्कूल नहीं टूटा,  
मेरा बचपन बिखर गया है।

😩😓😓😢


Rate this content
Log in