लिखती हूँ ताकि खामोशी बयान हो सके। अल्फ़ाज़ अधूरे हैं, पर जज़्बात पूरे हैं।✍️✍️ #simmiwrites
रात के 2 बजे, जब अकेलेपन की आवाजें तेज हों, तो कैसे खुद की आवाज को पहचानें? एक कहानी जो अंदर की यात... रात के 2 बजे, जब अकेलेपन की आवाजें तेज हों, तो कैसे खुद की आवाज को पहचानें? एक ...
जब अपनों की आवाज़ ही चुभने लगे, तब दिल के गहरे राज़ बाहर आते हैं। क्या रिश्ते सिर्फ ज़रूरत के मोहताज ह... जब अपनों की आवाज़ ही चुभने लगे, तब दिल के गहरे राज़ बाहर आते हैं। क्या रिश्ते सिर...