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Simmi Negi

Tragedy Action Crime

4.4  

Simmi Negi

Tragedy Action Crime

खामोश कोना

खामोश कोना

2 mins
27

 रात के 2 बजे थे। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज़ थी। और मेरा दिमाग... वो तो जैसे माइक लेकर बैठ गया था। "देखा? कोई नहीं है तेरे साथ। पहली आवाज़ बोली। सब चले गए। तू ही गलत थी। दूसरी आवाज़ फुसफुसाई। थोड़ा समझौता कर लेती तो आज ये दिन ना देखना पड़ता। तीसरी आवाज़ ताना मार गई। मैं तकिए में मुंह छुपाकर लेट गई। सोचा सो जाऊं... पर ये आवाज़ें सोने नहीं देतीं। तभी फोन की स्क्रीन जली। कोई मैसेज नहीं था। बस टाइम देख रही थी। और उसी पल एक चौथी आवाज़ आई। ये वाली सबसे धीमी थी... पर सबसे अपनी थी। अरे, तू अकेली नहीं है। मैं हूं ना। वही जो तेरे साथ रोई थी। वही जो तेरे साथ उठी थी। वही जो हर बार हार कर भी फिर खड़ी हुई थी। मैं चौंक गई। ये आवाज़ बाहर से नहीं आई थी। ये मेरे अंदर से आई थी। उस रात समझ आया... अकेलापन हमें तोड़ने नहीं आता। वो हमें खुद से मिलवाने आता है। उन शोर वाली आवाज़ों को बंद करने के लिए बस खुद की आवाज़ को तेज़ करना पड़ता है। सुबह हुई। पंखा अब भी चल रहा था। पर दिमाग शांत था। क्योंकि अब मैं जान गई थी... __सबसे बड़ा साथी और सबसे बड़ा दुश्मन दोनों दिमाग के अंदर ही रहते हैं। चुनना हमें है किसे सुनना है। --- परेशान मत हो।  तो इस आवाज को सुनकर मुझे बहुत सुकून मिला 


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