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Simmi Negi

Tragedy

4.5  

Simmi Negi

Tragedy

अनुभव का अध्ययय

अनुभव का अध्ययय

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24

अपने जीवन के बूरे पहलुओं को याद करती हूं मैं 
जीवन के नए सवेरे से डरती हूं मैं 
जीवन की हर रातों से दूर जाना चाहती हूं मैं 
अब हर व्यक्ति से मुंह फेर लेना चाहती हूं मै

 सपनों की आवाज़ अब धीमी लगती है 
दिल की धड़कन भी थकी थकी लगती है 
शीशे में जो चेहरा दिखता है अपना 
वह मुझसे ही अब अजनबी सा लगता है

खिड़की बंद दरार भी नहीं
अंधेरा पूरा है किरण भी नहीं 
सुबह आएगी शायद पर मेरे लिए नहीं 
मैं बस रात बन कर रह गई हूं यहीं 

#sadlife#darkpoetry#unhappylife #simmiwriter


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