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Samar Pradeep

Romance Classics

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Samar Pradeep

Romance Classics

बरसात बुला लेता है

बरसात बुला लेता है

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गर बीनाई तेज़ न हो तो आँख चुरा लेता है

दूर से पहले जो नज़दीकी चीज़ उठा लेता है


नाव बचानी हो तो सैलाब नहीं देखे जाते

हाथ बढ़ाना हो जिसने वो हाथ बढ़ा लेता है


उसकी हर आवाज़ खनक ऐसी पैदा करती है

वो जब चाहे सहरा में बरसात बुला लेता है।


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