दरिया
दरिया
कश्ती पर ऐसा भार न हो,
जिससे ये दरिया पार न हो
टूटो तो इतना ही टूटो,
जितने से दिल बीमार न हो,
फूल बिछाओ राह में उस की,
याद रहे कोई ख़ार न हो,
ग़लती हो भी तो ऐसी हो,
ग़लती वो जो हर बार न हो,
तामीर करो घर घर जैसा,
घर वो जिस में दीवार न हो।

